सीधे मुख्य सामग्री पर जाएं

24 मेरा आपकी कृपा से

मेरा आपकी कृपा से, सब काम हो रहा हैं
मेरा आपकी दया से, सब काम हो रहा हैं
करते हो तुम कन्हैया, मेरा नाम हो रहा है
मेरा आपकी कृपा से, सब काम हो रहा हैं

मेरा आपकी दया से, सब काम हो रहा हैं
पतवार के बिना ही, मेरी नाव चल रही हैं
हैरान है ज़माना, मंजिल भी मिल गयी हैं
करता नहीं मैं कुछ भी, सब काम हो रहा है
करते हो तुम कन्हैया, मेरा नाम हो रहा है
मेरा आपकी कृपा से, सब काम हो रहा हैं

तुम साथ हो जो मेरे, किस चीज़ की कमी है
किसी और चीज़ की अब, दरकार भी नहीं हैं
तेरे साथ से गुलाम अब, गुलफाम हो रहा है
करते हो तुम कन्हैया, मेरा नाम हो रहा है
मेरा आपकी कृपा से, सब काम हो रहा हैं

मैं तो नहीं हूँ काबिल, तेरा पार कैसे पाऊं
इस टूटी हुए वाणी से, गुणगान कैसे गाऊं
तेरी प्रेरणा से ही सब, यह कमाल हो रहा हैं
करते हो तुम कन्हैया, मेरा नाम हो रहा है
मेरा आपकी कृपा से, सब काम हो रहा हैं

करता नहीं मैं फिर भी, हर काम हो रहा हैं
कन्हैया तेरी बदौलत, आराम हो रहा हैं
बस होता रहे हमेशा, जो कुछ भी हो रहा हैं
करते हो तुम कन्हैया, मेरा नाम हो रहा है
मेरा आपकी कृपा से, सब काम हो रहा हैं
मेरा आपकी कृपा से, सब काम हो रहा हैं
मेरा आपकी दया से, सब काम हो रहा हैं
करते हो तुम कन्हैया, मेरा नाम हो रहा है
मेरा आपकी कृपा से, सब काम हो रहा हैं
मेरा आपकी दया से, सब काम हो रहा हैं

ओ मेरे कन्हैया, जब आपकी कृपा इस दास पर हो ही रही है तो, मैं क्यों किसी और के पास जाऊं ??? क्यों मैं किसी और का अहसान लूँ, मुझे तो बस अब तेरे नाम का ही सहारा काफी हैं …

अहसान लूँ किसी का, ये मुझको नहीं गंवारा
जीने को जब काफी हैं, तेरे नाम का सहारा

माना की धीरे धीरे, मेरी नाव चल रही है
लेकिन सही दिशा में, मंजिल पे बढ़ रही हैं
भले देर से मिले पर, मिल जायेगा किनारा
जीने को जब काफी हैं, तेरे नाम का सहारा

काबिल नहीं हूँ जिसका, वो इनाम ले लिया हूँ
पूछे बिना ही तुमसे, तेरा नाम ले लिया हूँ
इसके सिवा लिया न, कुछ और तो तुम्हारा
जीने को जब काफी हैं, तेरे नाम का सहारा

तेरा नाम लेके जागुं, तेरा नाम लेके सोऊं ,
तेरे नाम के सहारे, जीवन अपना बिताऊं,
अपना तो चल रहा है, आराम से गुजारा
जीने को जब काफी हैं, तेरे नाम का सहारा
तेरे नाम का करिश्मा, मैंने तो जब से जाना

सब छोड़ कर हुआ मैं, तेरे नाम का दीवाना
मुझको तो सारे जहां से, तेरा नाम लगता प्यारा
जीने को जब काफी हैं, तेरे नाम का सहारा
अहसान लूँ किसी का, ये मुझको नहीं गंवारा
जीने को जब काफी हैं, तेरे नाम का सहारा

मेरा आपकी कृपा से, सब काम हो रहा हैं
मेरा आपकी दया से, सब काम हो रहा हैं
करते हो तुम कन्हैया, मेरा नाम हो रहा है
मेरा आपकी कृपा से, सब काम हो रहा हैं
मेरा आपकी दया से, सब काम हो रहा हैं

टिप्पणियाँ

इस ब्लॉग से लोकप्रिय पोस्ट

कृपा मयी कृपा करो

कृपामयी कृपा करो , प्रणाम बार बार है। दयामयी दया करो , प्रणाम बार बार है।। न शक्ति है न भक्ति है , विवेक बुद्धि है नहीं। मलीन दीन हीन हुं , पुण्य शुद्धि है नहीं।। अधीर विश्वधार बीच डूबता शिवे सदा। अशान्ति भ्रांति मोह शोक , राह रोकते सदा।। विपत्तियाँ अनेक अम्बे , आपदा अपार है। कृपामयी कृपा करो , प्रणाम बार बार है।।   तुम्हे अगर कहो , कहु कहाँ विपत्ति की कथा। सुने उसे कौन अगर , सुनो न देवी सर्वथा।। सृजन विनास स्वामीनी , समस्त विश्व पालिका। अदृश्य विश्व प्राण शक्ति , एकमेव कालिका।। कठोर तू तथापि भक्त , के लिए उदार है। कृपामयी कृपा करो , प्रणाम बार बार है।।   असंख्य हैं विभूतियाँ , अनंत शौर्य शालिनी। अखण्ड तेज राशियुक्त , देवि मुंड मालिनी।। समस्त सृष्टि एक अंश , में प्रखर प्रकाशिका। विवेक दायिका विमोह , पाप शूल नाशिका।। क्षमामयी क्षमा करो , उठी यही पुकार है। दयामयी दया करो , प्रणाम बार बार है।।   शिवे विनीत भावना , लिए हुए खड़ा हुआ। चरण सरोज में अबोध , पुत्र है पड़ा हुआ।। कृपामयी सुदृष्टि मां , एकबार तू निहार दे। मिटे रोग ...

3 संतन के संग लाग रे

संतन के संग लाग रे तेरी अच्छी बनेगी। अच्छी बनेगी तेरी किस्मत जगेगी।। होए तेरो बड़ भाग रे।। तेरी अच्छी बनेगी... रामचरण अनुराग रे तेरी अच्छी बनेगी... ध्रुव जी की बन गई प्रहलाद की बन गई। हरि सुमिरन में जाग रे।। तेरी अच्छी बनेगी... कागा से तोहे हंस करेंगे, कागा से तोहे हंस करेंगे। मिट जाए उर के भाग रे।। तेरी अच्छी बनेगी... मोह निसा में बहु दिन खोयो।। जाग सके तो जाग रे।। तेरी अच्छी बनेगी... सुत वित नारी तीन आशाएं।। त्याग सके तो त्याग रे।। तेरी अच्छी बनेगी... कहत कबीर राम सुमिरन में पाग सके तो पाग रे।। तेरी अच्छी बनेगी...

दास रघुनाथ का

दास रघुनाथ का नंद सुत का सखा.२ कुछ इधर भी रहा कुछ उधर भी रहा। सुख मिला श्रीअवध और वृजवास का कुछ इधर भी रहा कुछ उधर भी रहा। मैथिली ने कभी गोद मोदक दिया राधिका ने कभी गोद में लेलिया मातृ सत्कार में मग्न होकर सदा कुछ इधर भी रहा कुछ उधर भी रहा। खूब ली है प्रसादी अवधराज की खूब जूठन मिली मुझको वृजराज की भोग मोहन भी था दूध माखन चखा कुछ इधर भी रहा कुछ उधर भी रहा। उस तरफ द्वार दरवान हूं राज का इस तरफ दोस्त हूं दानी सरताज का सर झुकाता हुआ जर जुटाता हुआ कुछ इधर भी रहा कुछ उधर भी रहा। कोई नर या इधर वा उधर ही रहा कोई नर न इधर न उधर का रहा बिन्दु दोनों तरफ ले रहा हूँ मजा  कुछ इधर भी रहा कुछ उधर भी रहा।