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29 मोहन हमारे मधुवन में

मोहन हमारे मधुवन में तुम आया ना करो।
जादू भरी बांसुरी बजाया ना करो।।

सूरत तुम्हारी देख के सलोनी सावरी।
सुन बांसुरी की राग हम हो गई बावरी।।
माखन को चुराने वाले2
दिल चुराया ना करो।। जादू भरी…

माथे मुकुट गलमाल कटी में काछनी सोहे।
कानों में कुंडल झुमके मन मेरे को मोहे।।
इस चंद्रमा से रूप को लुभाया ना करो।। जादू भरी…

अपनी यशोदा मात की सौगंध है तुमको।
जमुना नदी के तीर पर तुम ना मिलो हमको।।
इस बांसुरी की तान दे बुलाया ना करो।। जादू भरी…

इसी तुम्हारी बांसुरी ने मोहिनी डारी।
चंद्र सखी की विनती तुम सुनियो बनवारी।।
दर्शन देदो सांवरा अब देर ना करो।। जादू भरी…

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